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Saturday, January 3, 2009

बरस.......... बरस...........

बरस बरस कई बरस ,
मत तरस केवल बरस ,
बरस बरस और बरस ,
कई .....बरस,

घटा अभी घटा नहीं ,
हट मत घट मत ,
सोच जरा ,
बेबस धरा पर जरा ,
थक मत हट मत ,
घटा अभी घटा नहीं ,


हर कदम हर कदम ,
टूटती आशा निकलते है दम ,
पर ,
टूट न हर दम ........,
बस कर बढ़ चल ,
बस एक और कदम ,
मन की आश न कर निराश ,
कामयाब और कामयाब ,
बढ चल एक और कदम ,

बेसब्र देश भर .....,
कला धन ,
अपराधी मन ,
पद को कर बदनाम,
न्याय की आश.......,
टूटकर कहती है...,
बस.......! ,
बरस बरस इस बरस ,
अब बरस..... और बरस.. ,
बरस बरस इस बरस ,
_____________--अम्बरीष मिश्रा
इस सार.... भरी कविता को पहली क्लास का बच्चा भी पढ़ लिख सकता है


इस कविता की फिल्म हो तो ......... देखना है click upon my little hart {♥}


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