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Thursday, January 8, 2009

और शीबू शोरेन के हाथ न लगी सौगात...................

और शीबू शोरेन के हाथ लगी सौगात...................

एक सोच थी उप्ज़ी ..... नया प्र्देश बनने की..
मन मे उस्ने ठान लिया कुछ न्या दिखाने की....
यही आशा के साथ उठा भाग्य आज्मने को
परिवर्तन का मन था पर..........

मन का, परिवर्तन हो गया
नेता से अप्राधी बन ग्या .......
सजा हुयी जेल गया ...........
छुटा उसको बेल मिली ....


सत्ता का लालची मन उसको खीच रहे था ......
पर बद्ला समाज़ उसको त्याग रहा था .....
क्योकि वो अब अपराधी था .....


पर समय किसी का नही होता .......
देश की सत्ता पर सकट खडा था .......
तब शोरेन के सम्थरन से जीबन दान मिला था .....
और ले दे कर एक पुराना सप्ना सच हुआ था .....


पर लोक्त्तन्त्र को जैसे तमाचा किसी ने मारा हो ...
जनता ने भी मन बना लिया ...
जो सोच से परे है वो उस्ने दिखा दिया

सत्ता की नजरो मे वो हीरा था
और लोकतन्त्र मे वो हारा था
सब कुछ उस्ने खो दिया था ...
उस सत्ता के तमाचे के ............
पर आज लोकतन्त्र का जबाब था ...........





आप अपनी राय अवश्य दे ।

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