- एक बहस है कि पब संस्कृति को आगे बराना चाहिए कि नहीं
- * सबसे पहली बात तो यह कि पब कोई संस्कृति नहीं है बल्कि विकृति है, अतः विकृति को फैलाना चाहियी कि नहींस्वयं ही विचारें
- * जो शिला दिक्षित मुख्य मंत्री दिल्ली एवं महिला आयोग भी इसके समर्थन में है तो वो बताएं कि
- * स्त्री/पुरुष के शौचालय फिर अलग-अलग रखने कि क्या जरुरत है?
- *वैश्या वृति पर भी आयकर लगाने में क्या बुराई है?
- *ब्लू फिल्मों को सामान्य फिल्म कि तरह क्यों नहीं माना जाये?
- *पोर्न वेबसाइट को कही भी देखे जाने में क्या बुराई है?
- *स्कूल में सेक्स एजूकेशन देते समय स्टुडेंट आपस में सेक्स सम्बन्ध बनाकर प्रैक्टिकल भी करले जिस पर मार्कसभी मिलने चाहिए,
मेरी राय में ...
इसको रोका जाना चहिये क्योकि
स्त्री शारीरिक व मानसिक रूप से कमज़ोर होती है |
नसा स्त्रीयो को कितना कमज़ोर कर सकता है इसका अनुमान
एक नाली में गिरे आदमी से लगाया जा सकता है ( महिलायों का निर्माण नही पतन होगा )
अम्बरीष मिश्रा
वन्देमातरम


1 comment:
sochne per majbur karti hai aapki baate.
Post a Comment