लोकतंत्र है ....... आज़ादी है ........ पर कुछ भी लिखे की नही ...........
ये ब्लॉग आप का बेसक है पर है तो आप कानून के दायरे में ही
क्योकि ये ब्लॉग कोई खेल नही
ये है लोकेश जी की राय जिनका अदालत नाम से ब्लॉग है
सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, ब्लॉग पर मौजूद शब्दों, विषय के लिए ब्लॉगर को मुकदमे का सामना भी करना पड़ सकता है। यानी किसी मुद्दे पर ब्लॉग शुरू करके दूसरों को उस पर मनचाहे और अनाप-शनाप टिप्पणियाँ पोस्ट करने के लिए आमंत्रण करना अब सुरक्षित नहीं रहेगा। कोर्ट के मुताबिक, टिप्पणी के रूप में दी गई राय के लिए उसे भेजने वाला जिम्मेदार है, यह कहकर ब्लॉगर खुद को नहीं बचा सकता। कोर्ट ने ये बातें केरल के 19 साल के कंप्यूटर साइंस के स्टूडेंट और ब्लॉगर अजीत से जुड़े केस में कही हैं।
याचिकाकर्ता अजीत डी. ने एक सोशल नेटवर्किंग साइट पर शिव सेना के खिलाफ एक कम्यूनिटी शुरू की थी। इस कम्यूनिटी में ऐसी कई पोस्ट और अज्ञात लोगों द्वारा की गई टिप्पणियाँ थीं, जिनमें शिवसेना पर धर्म के आधार पर देश को बांटने का आरोप लगाया गया था। इस पर शिवसेना की ओर से शिकायत दाखिल की गई। इसके आधार पर पुलिस ने अजीत के खिलाफ एफआईआर दर्ज करते हुए जन भावनाओं को चोट पहुंचाने का आरोप लगाया था। महाराष्ट्र कोर्ट द्वारा जारी समन से बचाने और केस खारिज करने के लिए अजित ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी थी। पर अदालत ने समन से बचाने से इनकार कर दिया।
चीफ जस्टिस के. जी. बालाकृष्णन और जस्टिस पी. सतशिवम की बेंच ने कहा कि अगर कोई ब्लॉग की टिप्पणी के आधार परआपराधिक मामला दर्ज करवाता है तो आपको केस का सामना करना पड़ेगा। आपको कोर्ट के सामने पेश होकर अपने व्यवहार पर सफाई देनी होगी।
पुरानी जींस और गिटार. घर की वो छत और मेरा यार...
-
हम बाप-बेटी और पत्नी किसी एक्सीडेंट पर चर्चा कर रहे थे. बात एक्सीडेंट से
होते हुए ना जाने किधर-किधर चली गई. फिर आखिर में किसी बात पर मेरे द्वारा एक
दोस्त...


No comments:
Post a Comment